वकील सीमा कुशवाहा BSP में शामिल: निर्भया कांड के दोषियों को दिलवाई थी फांसी की सजा, अब सियासत में हाथ आजमाएंगी

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नई दिल्ली7 घंटे पहले

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निर्भया गैंगरेप कांड सीमा के करियर का पहला अदालती केस था। इसमें उन्हें कामयाबी मिली और वे चर्चा में भी आ गई थीं। -फाइल फोटो

दिल्ली के निर्भया कांड के आरोपियों को फांसी की सजा दिलवाने वाली वकील सीमा कुशवाहा बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गई हैं। यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने सीमा को पार्टी की सदस्यता दिलवाई।

इटावा के लखना गांव की रहने वाली सीमा ने कानून की पढ़ाई के साथ कानपुर से वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी। कानपुर में हालात अच्छे नहीं होने के कारण वो दिल्ली चली गईं और दिल्ली यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई पूरी की।

निर्भया गैंगरेप कांड सीमा के करियर का पहला अदालती केस था। इसमें उन्हें कामयाबी मिली और वे चर्चा में भी आ गईं। इसके बाद से अब तक सीमा कई दुष्कर्म पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने साफ किया है कि वे रेप पीड़िताओं के केस लड़ती रहेंगी।

राजनीति के लिए BSP ही क्‍यों?
बसपा जॉइन करने के बाद सीमा ने कहा कि मुझसे ये सवाल किया जाएगा कि मैंने यही पार्टी क्यों जॉइन की, तो मेरा जवाब यही होगा कि एक बेटी संघर्ष करके 4 बार यूपी की मुख्‍यमंत्री बनती है। उसने देश ही नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहराया। बसपा के कार्यकाल में मायावती ने दिखा दिया कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के बनाए गए संविधान का पालन कैसे किया जाता है।

बसपा की सरकार में सुरक्षित थीं बेटियां
सीमा ने कहा- दिल्ली में हुए निर्भया कांड के दरिंदो को मैने फांसी की सजा दिलवाई। दिल्ली में एक बेटी के साथ हुई दरिंदगी बताती है कि वहां लॉ-एंड-आर्डर पूरी तरह से फेल है। मायावती की सरकार में यूपी में बेटियां सुरक्षित महसूस करती थीं। अगर मायावती पांचवी बार यूपी की सीएम बनती हैं, तो प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

बसपा के लिए चुनौतीपूर्ण होगा यूपी चुनाव
यूपी में विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आ चुकी है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा और अखिलेश की समाजवादी पार्टी के सामने मायावती के पार्टी बसपा की धमक धीमी पड़ती जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में जहां एक तरफ भाजपा सत्ताधारी पार्टी के रूप में चुनी गई थी तो वहीं, सपा प्रदेश में विपक्ष की अहम भूमिका निभा रही है। ऐसे में भाजपा और सपा के मुकाबले बसपा की सक्रियता बेहद कम दिखाई दे रही है।

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