सर्दी-खांसी बनकर रह जाएगा कोरोना: भारत के टॉप साइंटिस्ट का दावा- 11 मार्च तक महामारी बन सकती है एंडेमिक, जानिए 5 बड़ी वजहें

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4 मिनट पहले

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भारत में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के टॉप साइंटिस्ट समीरन पांडा का एक बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा है कि अगर ओमिक्रॉन के बाद कोरोना का कोई नया वैरिएंट नहीं आता है, तो 11 मार्च तक ये महामारी एंडेमिक स्टेज में आ जाएगी। इसका मतलब वायरस के संक्रमण की रफ्तार काफी धीमी हो जाएगी।

पहले जान लें, क्या होती है एंडेमिक स्टेज?

अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, कोई बीमारी एंडेमिक स्टेज में तब मानी जाती है, जब उसकी मौजूदगी स्थाई और प्रसार सामान्य हो जाता है। ऐसे में महामारी का असर कम लोगों या किसी खास इलाके तक सीमित हो जाता है। इसके साथ ही वायरस भी कमजोर हो चुका होता है। इसके अलावा लोग भी उस बीमारी के साथ जीना सीख जाते हैं।

कोरोना महामारी की एंडेमिक स्टेज आने की 5 बड़ी वजहें:

  • ओमिक्रॉन गंभीर नहीं, माइल्ड: मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड के डॉ निरंजन पाटिल कहते हैं कि ओमिक्रॉन कोरोना के पिछले वैरिएंट्स के मुकाबले माइल्ड है। ये फेफड़ों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाता, जिससे निमोनिया, ऑक्सिजन की कमी और ICU में भर्ती होने का खतरा बहुत कम हो जाता है। ओमिक्रॉन के 85-90% मामलों में मरीज को इसके कोई लक्षण नहीं आते।
  • कोरोना वैक्सीन का असर: टोरंटो यूनिवर्सिटी की इम्यूनोलॉजिस्ट जेनिफर गोम्मरमैन कहती हैं कि मौजूदा वैक्सीन और उनके बूस्टर डोज हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत कर रहे हैं। इससे हम कोरोना से होने वाली गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से भी बच जाते हैं। दुनिया भर की कई कंपनियां ओमिक्रॉन को निशाना बनाने के लिए नई तरह की वैक्सीन भी तैयार कर रही हैं।
  • ओमिक्रॉन संक्रमण दूसरे वैरिएंट्स के खिलाफ बढ़ाता है इम्यूनिटी: दक्षिण अफ्रीका में हुई एक हालिया रिसर्च में पाया गया है कि ओमिक्रॉन संक्रमण होने पर डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बनती है। हालांकि, यह तभी मुमकिन है जब मरीज फुली वैक्सीनेटेड हो।
  • ओमिक्रॉन बनेगा डोमिनेंट कोरोना वैरिएंट: अमेरिका के टॉप साइंटिस्ट एंथनी फौसी के अनुसार, कोरोना के नए वैरिएंट से दुनिया में लगभग सारे लोग संक्रमित होंगे। अगर ऐसा होता है तो ओमिक्रॉन विश्व में एक डोमिनेंट कोरोना वैरिएंट बन जाएगा और लोगों में इसके खिलाफ नेचुरल इम्यूनिटी बन जाएगी।
  • कोरोना का घातक रूप मरीज के साथ ही मर जाता है: विशेषज्ञों का मानना है कि जो वायरस लोगों की जान लेता है, वह उन्हीं के साथ मर जाता है। नेचर में वायरस का वही रूप जीवित रह पाता है, जिसके साथ दुनिया की बड़ी आबादी जिंदा रह सके। जिस तरह 1918 में आई फ्लू महामारी आज केवल सर्दी-खांसी वाला वायरस बनकर रह गई है, ऐसा कोरोना के साथ भी हो सकता है।

देश के लिए ओमिक्रॉन 11 दिसंबर से बना था संकट

डॉ समीरन पांडा ने एक एनालिसिस के जरिए बताया है कि देश में 11 दिसंबर से ओमिक्रॉन वैरिएंट ने परेशानी बढ़ाई थी। यह संकट 3 महीने तक बना रहेगा। उनका कहना है कि 11 मार्च तक ही हमें कोरोना से कुछ राहत मिलेगी। डॉ पांडा कहते हैं कि यदि ओमिक्रॉन डेल्टा की जगह ले लेता है और उसके बाद कोई नया वैरिएंट सामने नहीं आता है, तो इसे कोरोना महामारी का एंडेमिक स्टेज में आना माना जाएगा।

मुंबई-दिल्ली में पीक आई या नहीं, ये कहना अभी मुश्किल

डॉ पांडा कहते हैं कि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में कोरोना की पीक आई है या नहीं, अभी इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। उनके अनुसार इस सवाल का जवाब 2 हफ्ते बाद ही मिल पाएगा क्योंकि देश के अलग-अलग राज्य तीसरी लहर के अलग-अलग चरणों में हैं। फिलहाल इन शहरों में ओमिक्रॉन और डेल्टा का अनुपात 80:20 है।

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