सवालों के घेरे में अंकिता मर्डर केस: वह VIP कौन…जिसने एक्स्ट्रा सर्विस देने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया; नहीं मानी तो की हत्या

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देहरादून2 मिनट पहलेलेखक: मनमीत

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उत्तराखंड में 19 साल की अंकिता भंडारी की हत्या से लेकर अंतिम संस्कार तक कई पहलू गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। हत्या के बाद 4 दिन तक पूर्व भाजपा मंत्री विनोद आर्य का बेटा हत्या के आरोपी पुलकित पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया था, क्योंकि उसे तलाशा ही नहीं। फोटो वायरल होने के बाद लोग सड़कों पर उतरे तो उसे बचाने के लिए परिवार ने ही पुलिस को सौंपा। उसकी निशानदेही पर अंकिता का शव बरामद कर लिया गया। इसी दौरान एक महिला भाजपा विधायक काफी सक्रिय रहीं।

वहीं, पुलिस की लेटलतीफी से जुड़ी कई ऐसी कड़ियां हैं, जिनके जवाब पुलिस और प्रशासन के पास नहीं हैं। भाजपा नेता के बेटे पुलकित के रिसॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करने वाली अंकिता की हत्या का मामला अब SIT देख रही है। पुलकित अंकिता को वेश्यावृत्ति में धकेलना चाहता था। अंकिता ने इसका विरोध किया तो मार दिया।

वो 5 सवाल… जिनके जवाब पुलिस नहीं दे रही, इसलिए मामला संदिग्ध होता जा रहा

सवाल-1: जिस VIP को खुश करने को कहा, जांच में नाम क्यों नहीं?
अंकिता ने अपनी दोस्त को वॉट्सएप चैट में बताया था कि एक VIP गेस्ट आने वाला है। रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य दबाव बना रहा है कि तरक्की चाहिए तो उस गेस्ट को ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ देनी पड़ेगी। इसके 10 हजार रुपए मिलेंगे। अंकिता ने साफ इनकार कर दिया। इस पर पुलकित-अंकिता में झगड़ा हुआ। इसी दौरान उसे नहर में धकेलकर मार दिया गया।

पुलिस जांच में अभी तक यह नहीं आया कि वह VIP गेस्ट कौन था। अंकिता ने दोस्त को बताया था कि वह गेस्ट पहले भी कई बार रिसॉर्ट में आता रहा है।

सवाल-2: VIP के लिए बुक कमरे में सबसे पहले आग क्यों?
लोग रिसॉर्ट के बाहर विरोध कर रहे थे, तब भाजपा विधायक रेणु बिष्ट वहीं थीं। आगजनी किसने शुरू की, कोई नहीं जानता। सबसे पहले उस कमरे में आग लगाई गई, जो VIP गेस्ट के लिए बुक था। वह वहां ठहरा या नहीं, इसका भी पुख्ता रिकॉर्ड नहीं है।

अहम यह है कि फॉरेंसिक टीम कमरे में जांच के लिए 26 सितंबर को पहुंची, जबकि इसे शनिवार को ही खाक कर दिया गया था। हालांकि, पौड़ी के SSP शेखर सुयाल कह रहे हैं कि उनकी टीम ने 22 सितंबर को ही रिसॉर्ट की वीडियोग्राफी करा ली थी।

सवाल-3: पानी में शव पांच दिन तक न फूला, न ही नुकसान पहुंचा
पुलिस के अनुसार, हत्या 19 को हुई, शव 24 सितंबर को मिला। वो भी उसी जगह, जहां उसे फेंका गया था। ऐसे में सवाल उठते हैं कि बहती नहर में 5 दिन तक शव एक जगह कैसे पड़ा रहा? उस पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी? शव फूला क्यों नहीं? जबकि, अकसर ऐसा होता है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, अंकिता के शरीर पर चोटें थीं, खून बहा था, 1 दांत भी टूटा था। तो फिर 5 दिन तक मछलियों ने शव को नुकसान क्यों नहीं पहुचाया? यानी हत्या का समय भी संदिग्ध है।

सवाल-4: जिस मोर्चरी में शव रखा था, वहां परिवार से भी पहले पहुंचकर विधायक रेणु क्या कर रही थीं?
भाजपा विधायक रेणु बिष्ट मॉर्चरी में भी परिवार से पहले पहुंच गई थीं। शव 24 सितंबर को बरामद हुआ था। इस सूचना के बाद अंकिता के पिता और भाई नहर पर गए। लेकिन, उन्हें शव देखने नहीं दिया गया। शव एम्स ऋषिकेश की मॉर्चरी में रखवाया गया। कुछ देर बार जब परिवार मॉर्चरी पहुंचा तो विधायक रेणु बिष्ट वहां पहले से मौजूद थीं। लोगों ने उनका विरोध किया तो उन्हें वहां से जाना पड़ा।

सवाल-5: बुलडोजर चलने के बाद प्रशासन चुप था, सवाल उठे तो डीसी बोले- हमने आदेश नहीं दिए थे
रिसॉर्ट पर बुलडोजर चला। कुछ दीवारें गिराईं, बिल्डिंग का स्ट्रक्चर सुरक्षित रखा। जिस समय यह घटना हुई, भाजपा विधायक रेणु बिष्ट वहीं थीं। इस घटना के 24 घंटे बाद अंकिता के परिवार ने आरोप लगाए कि सबूत मिटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया। उसके बाद डीसी और एसडीएम ने कहा कि उन्होंने बुलडोजर चलाने के आदेश नहीं दिए थे। अब इस बात की भी जांच हो रही है कि बुलडोजर किसने चलवाया।

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