Kashmir: कश्मीर में क्यों तेजी से बढ़ रहे सुसाइड के केस? सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Kashmir Suicide Cases: कश्मीर में आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयास के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है. सरकारी एजेंसियों द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि घाटी में आत्महत्या करने से लगभग 127 लोगों की मौत हो गई. फरवरी 2021 से कश्मीर में 365 से अधिक आत्महत्या के प्रयासों के मामले सामने आए हैं. एसडीआरएफ की रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि आत्महत्या के 365 प्रयास दर्ज हुए हैं, जबकि आत्महत्या करने के बाद 127 लोगों की मौत हो गई, 238 बच गए. 

एसडीआरएफ की रिपोर्ट कर देगी दंग

कश्मीर में एसडीआरएफ के कमांडेंट हसीब उल रहमान ने कहा कि हमने ‘सुकून’ नामक एक मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन शुरू की है. जिसके तहत कि गए सर्वे में ये आत्महत्या के मामले सामने आए. हमारे पास जो आंकड़े हैं, वे बताते हैं कि फरवरी 2021 से जून 2022 तक 365 आत्महत्या के प्रयास किए गए हैं. आत्महत्या के कारण 127 लोग मारे गए और इन प्रयासों में 238 बच गए. ये बहुत बड़े आंकड़े हैं और कोविड के बाद आत्महत्या के प्रयासों की संख्या में वृद्धि हुई है.

बडगाम में सबसे ज्यादा सुसाइड की कोशिश

डेटा यह भी बताता है कि मध्य कश्मीर के बडगाम जिले से आत्महत्या के सबसे अधिक प्रयास किए गए. बडगाम में 72 आत्महत्या के प्रयासों के मामले सामने आए. जबकि उत्तरी कश्मीर के बारामूला में 61 की आत्महत्या के प्रयास के मामले सामने आए. दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में 55 आत्महत्या के प्रयास किए गए, जबकि उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में 51 की सूचना मिली. उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा में 34 आत्महत्या के प्रयासों की सूचना मिली थी.  दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में इस तरह के 19 प्रयास किए गए जबकि पुलवामा में 15 मामले दर्ज किए गए. जिला कुलगाम में आत्महत्या के 25 प्रयास और श्रीनगर शहर में 17 मामले दर्ज किए गए.

सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

विभिन्न जिलों में हुई मौतों के आंकड़े भी मिले हैं. श्रीनगर में 17, गांदरबल में 11, बांदीपोरा में 08, शोपियां में 09, पुलवामा में 08, बडगाम में 11, अनंतनाग में 31, कुलगाम में 10, बारामूला में 15 और कुपवाड़ा में 07 सहित कुल 127 लोगों की मौत हो गई. घाटी के मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड के बाद वित्तीय, रिश्ते के मुद्दों और आइसोलेशन जैसे विभिन्न मुद्दों से तनाव ने इन लोगों को यह करने पर मजबूर किया. डॉक्टरों का मानना ​​है कि कश्मीर घाटी में युवाओं में जागरुकता बढ़ाने की जरूरत है. डॉक्टरों का यह भी कहना है कि आत्महत्या का संक्रमण है जिसे रोकने की जरूरत है.

क्यों फैल रहा आत्महत्या का संक्रमण?

जम्मू-कश्मीर सरकार में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर जोया मीर ने कहा कि आत्महत्या के संक्रमण की एक अवधारणा है. सर्वे बताते हैं कि अगर एक व्यक्ति की आत्महत्या से मृत्यु हो जाती है तो यह उसके आसपास के 135 लोगों को प्रभावित करता है. उन 135 लोगों में से 60 प्रतिशत पर अधिक असर पड़ता है, आत्महत्या के विचारों का. इस तरह हम आत्महत्या के संक्रमण को फैलते हुए देखते हैं. कभी-कभी जब यह एक क्षेत्र में स्थानीयकृत होता है, तो हमें उसी घटना के कारण अधिक रिपोर्ट किए गए मामले मिलते हैं. यह उपचार की मांग के बारे में भी है. श्रीनगर में अन्य की तुलना में उपचार की तलाश में बहुत अधिक विकल्प हैं. कभी-कभी यह उपचार के विकल्पों की कमी के कारण हो सकता है की यह विचार फैलता है.

‘सुकून’ और ‘जिंदगी’ की स्थापना

एसडीआरएफ की रिपोर्ट ने अधिकारियों के बीच खतरे की घंटी बजा दी है क्योंकि उनके लिए आत्महत्या की प्रवृत्ति वाले लोगों को संभालना एक नई चुनौती है. हर 20 लोगों में से एक में आत्महत्या की प्रवृत्ति है, सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए दो हेल्पलाइन “सुकून” और “जिंदगी” की स्थापना की थी. जहां अवसादग्रस्त लोगों को ऑनलाइन परामर्श दिया जाता है. अब सरकार को हर जिले में लोगों तक पहुंचना है ताकि उन्हें यह एहसास हो सके कि आत्महत्या सही रास्ता नहीं है.

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