Rajasthan: जोधपुर में 140 पाक विस्थापितों को मिली भारतीय नागरिकता, लोग बोले- ‘अब कलंक हटा’

140 लोगों की मिली भारतीय नागरिकता

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– फोटो : सोशल मीडिया

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जोधपुर जिले में लंबे समय से भारतीय नागरिकता का इंतजार कर रहे कुछ पाक विस्थापितों को भारत का नागरिक होने के प्रमाण पत्र दिए गए। जोधपुर जिला प्रशासन ने प्रदेश के गृह विभाग के निर्देश पर तैयार सूची के आधार पर कलेक्टर हिमांशु गुप्ता ने 140 लोगों को बुधवार को प्रमाण पत्र वितरित किए। इनमें कई लोग ऐसे थे, जिन्हें करीब दो दशक के इंतजार के बाद नागरिकता मिली है।

साल 2007 में पाकिस्तान के रहमियार खान से आए संजय का कहना है, आज नागरिकता मिलने से हम मुख्यधारा में आ गए हैं। अभी मैं बीए कर रहा हूं, अब मेरे जाति प्रमाणपत्र मूल निवास बन जाएंगे तो योजनाओं का भी लाभ मिल सकेगा। इसी तरह से खुद चार साल की उम्र में पाकिस्तान से आए युवक ने बताया, 22 साल के इंतजार के बाद उसे नागरिकता मिली है। पाकिस्तानी होने का कलंक अब हट गया। पाक विस्थापितों के लिए अरसे से काम करने वाले समाजसेवी हिंदू सिंह सोढ़ा का कहना है, यह नागरिकता आवेदन के आधार पर मिली है। लेकिन अब जरूरत है कि कैंप लगाकर लोगों को नागरिकता दी जाए। अगर इसमें किसी तरह की परेशानी है तो उसे स्थापित किया जाए।

भागचद भील ने बताया, बड़ी संख्या में आईबी के पास आवेदनों से जुड़े मामले लंबित हैं। अगर आईबी स्थानीय लोगों को शामिल कर उनकी जांच करें तो और ज्यादा लोगों को नागरिकता दी जा सकती है। एडीएम भास्कर विश्नोई ने बताया, नागरिकता के आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जाते हैं। गृह मंत्रालय और गृह विभाग के नियमानुसार नागरिकता जारी की जाती है। इस कड़ी में बुधवार को 140 लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र दिए गए हैं। जोधपुर के आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में पाक विस्थापितों को अभी तक नागरिकता का इंतजार है। एक अनुमान के मुताबिक, इनकी संख्या करीब 20 हजार से ज्यादा है।

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जोधपुर जिले में लंबे समय से भारतीय नागरिकता का इंतजार कर रहे कुछ पाक विस्थापितों को भारत का नागरिक होने के प्रमाण पत्र दिए गए। जोधपुर जिला प्रशासन ने प्रदेश के गृह विभाग के निर्देश पर तैयार सूची के आधार पर कलेक्टर हिमांशु गुप्ता ने 140 लोगों को बुधवार को प्रमाण पत्र वितरित किए। इनमें कई लोग ऐसे थे, जिन्हें करीब दो दशक के इंतजार के बाद नागरिकता मिली है।

साल 2007 में पाकिस्तान के रहमियार खान से आए संजय का कहना है, आज नागरिकता मिलने से हम मुख्यधारा में आ गए हैं। अभी मैं बीए कर रहा हूं, अब मेरे जाति प्रमाणपत्र मूल निवास बन जाएंगे तो योजनाओं का भी लाभ मिल सकेगा। इसी तरह से खुद चार साल की उम्र में पाकिस्तान से आए युवक ने बताया, 22 साल के इंतजार के बाद उसे नागरिकता मिली है। पाकिस्तानी होने का कलंक अब हट गया। पाक विस्थापितों के लिए अरसे से काम करने वाले समाजसेवी हिंदू सिंह सोढ़ा का कहना है, यह नागरिकता आवेदन के आधार पर मिली है। लेकिन अब जरूरत है कि कैंप लगाकर लोगों को नागरिकता दी जाए। अगर इसमें किसी तरह की परेशानी है तो उसे स्थापित किया जाए।

भागचद भील ने बताया, बड़ी संख्या में आईबी के पास आवेदनों से जुड़े मामले लंबित हैं। अगर आईबी स्थानीय लोगों को शामिल कर उनकी जांच करें तो और ज्यादा लोगों को नागरिकता दी जा सकती है। एडीएम भास्कर विश्नोई ने बताया, नागरिकता के आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जाते हैं। गृह मंत्रालय और गृह विभाग के नियमानुसार नागरिकता जारी की जाती है। इस कड़ी में बुधवार को 140 लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र दिए गए हैं। जोधपुर के आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में पाक विस्थापितों को अभी तक नागरिकता का इंतजार है। एक अनुमान के मुताबिक, इनकी संख्या करीब 20 हजार से ज्यादा है।

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