चारधाम की राह आसान, दिनों की यात्रा अब घंटों में: ऋषिकेश से देवप्रयाग के बीच तोताघाटी में सबसे कठिन चौड़ीकरण का काम भी पूरा, नौ किमी घटी दूरी

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  • The Path Of Chardham Is Easy, The Journey Of Days Is Now In Hours The Most Difficult Widening Work In Totaghati Between Rishikesh And Devprayag Was Also Completed, The Distance Decreased By Nine Km.

देहरादूनएक घंटा पहलेलेखक: मनमीत

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ऋषिकेश से गंगोत्री सात घंटे और

चारधाम की जिस दुरूह यात्रा में पहले कई दिन लगते थे, वह अब कुछ घंटों में सिमट गई है। करीब 889 किमी की ऑल वेदर रोड परियोजना का अधिकांश काम पूरा होने से चारधाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। ऋषिकेश से गंगोत्री तक करीब 226 किमी लंबे पर्वतीय रास्ते की दूरी तय करने में पहले पूरा दिन लग जाता था। इस रास्ते में ऋषिकेश से 70 किमी दूर चंबा में लंबा जाम लगता था, लेकिन अब अंडर ग्राउंड रास्ता बन जाने से वाहन सीधे बाइपास हो जाते हैं।

यहां से आगे का रास्ता चौड़ा होने से सात घंटे में ऋषिकेश से गंगोत्री पहुंचा जा सकता है। बद्रीनाथ की यात्रा भी आसान हो गई है। पहले ऋषिकेश से 292 किमी की दूरी तय करने में यात्रियों को रुद्रप्रयाग या चमोली में एक रात रुकना पड़ता था। अब यह यात्रा नौ घंटे में पूरी हो जाती है। जोशीमठ सहित कुछ और बाइपास बनने से और आसानी होगी। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट के बाकी बचे 165 किमी का काम भी तेजी से शुरू हो गया है।

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से भारतीय आर्मी को चीन के खिलाफ किसी भी आपात स्थिति से निपटने में आसानी होगी।

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से भारतीय आर्मी को चीन के खिलाफ किसी भी आपात स्थिति से निपटने में आसानी होगी।

इसमें मुख्य तौर पर उत्तरकाशी से गंगोत्री, पालीगाड से यमुनोत्री, जोशीमठ, चंपावत और केदारनाथ मार्ग पर फाटो के पास काम होना है। उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और सामरिक लिहाज से महत्वपूर्ण इस प्रोजेक्ट का सबसे कठिन काम ऋषिकेश से देवप्रयाग के बीच तोताघाटी का था। वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. एमपीएस बिष्ट बताते हैं कि यहां सड़क चौड़ी करने के लिए चूने की सख्त चट्‌टानें काटनी पड़ीं, जो बिल्कुल सीधी खड़ी थीं। अब इस रोड पर रॉक ट्रीटमेंट का ही काम बाकी है।

ऑल वेदर रोड के नोडल अधिकारी हरिओम शर्मा ने बताया, तोताघाटी का सबसे कठिन काम पूरा होने से अब नौ किमी की दूरी कम हो गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ऑल वेदर रोड परियोजना को 53 हिस्सों में बांटा था। इसमें से 38 पर काम पूरा होने को है।

बाइपास बनने से उत्तरकाशी से गंगोत्री, पालीगाड से यमुनोत्री, जोशीमठ, चंपावत और केदारनाथ मार्ग की पहुंच आसान होगी।

बाइपास बनने से उत्तरकाशी से गंगोत्री, पालीगाड से यमुनोत्री, जोशीमठ, चंपावत और केदारनाथ मार्ग की पहुंच आसान होगी।

दो प्रोजेक्ट के टेंडर जारी हो चुके हैं, जबकि 13 पर सुप्रीम कोर्ट की रोक हटने के बाद काम शुरू हो गया है। ऑल वेदर रोड परियोजना में राज्य की 889 किमी सड़कों को डबल लेन किया जाना था। करीब 12 हजार करोड़ की इस परियोजनों में अब तक आठ हजार करोड़ रुपए का काम हो चुका है। परियोजना के तहत 889 किमी सड़कों में से 724 किमी पर काम या तो पूरा हो चुका है या अंतिम चरण में है।

1935 में ठेकेदार तोता सिंह ने करवाया काम
ऋषिकेश-देवप्रयाग मार्ग का निर्माण पहली बार 1935 में शुरू हुआ। यहां बेहद कठोर चट्‌टानों और गहरी खाई के कारण कोई ठेकेदार काम को तैयार नहीं था। तब तोता सिंह इस शर्त पर तैयार हुए कि इस जगह का नामकरण उनके नाम पर होगा। काम के दौरान डेढ़ सौ से ज्यादा श्रमिकों की मौत हुई। तोता सिंह ने सारी पूंजी लगाकर निर्माण करवाया और भारी घाटा सहा। तब से इसका नाम तोताघाटी है। इससे पहले हाईवे चौड़ीकरण के समय यहां ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की गई।

53 हिस्सों में बंटा प्रोजेक्ट, 38 पर काम पूरा होने को

  • 12000 करोड़ है पूरी लागत, 2017 में हुई शुरुआत
  • 889 किमी रोड डबल लेन हो रहीं उत्तराखंड में
  • 724 किमी पर पूरा हो चुका है निर्माण कार्य
  • 165 किमी काम से हटी रोक
  • 8,000 करोड़ हुए खर्च

राह आसान हुई तो इस बार रिकॉर्ड यात्री पहुंचे
उत्तराखंड में इस बार भारी हिमपात और सर्दी के बीच 12 हजार से ज्यादा श्रद्धालु चारधाम पहुंचे। सबसे ज्यादा पांच हजार बद्रीनाथ पहुंचे। इस बार यात्री उखीमठ, तुंगनाथ और रुद्रनाथ भी गए। दिल्ली के अमित जायसवाल ने कहा, मैं पहले भी बद्रीनाथ आया था, पर अब रास्ता ऐसा है कि समय बचा और खतरे की आशंका भी नहीं रही।

यात्रा से समय बचा तो लोग ज्यादा जगहों पर घूम रहे
ऋषिकेश से चारधाम यात्रा में पहले दस दिन लग जाते थे। ऑल वेदर रोड का 70 फीसदी काम होने से अब 6 दिन लगते हैं। ऋषिकेश के ट्रैवल एजेंट दिनेश धनाई बताते हैं कि प्रोजेक्ट पूरा होने से समय और घटेगा। उन्होंने कहा, पहले यात्री केवल चारधाम के लिए आते थे। अब जो समय बच रहा है उसमें दूसरी जगहों पर भी घूम रहे हैं। निजी वाहन से आने वाले यात्रियों को और सहूलियत है।

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